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फेंग शुई: अंधविश्वास नहीं, घर का ‘मूड’ ठीक करने की विज्ञान सम्मत कला”

क्या कभी आपने सोचा है कि किसी के घर जाकर आपको बहुत शांति मिलती है, जबकि किसी और के घर में घुसते ही अजीब सी बेचैनी या थकान होने लगती है? दीवारें वही हैं, ईंट-पत्थर वही हैं, तो फर्क क्या है?
फर्क है ‘फेंग शुई’ का।
इसे भूल जाइए कि यह कोई चीनी जादू-टोना है। सरल शब्दों में कहें तो फेंग शुई आपके घर की सेटिंग (Setting) को सही करने का तरीका है, ताकि आपका दिमाग रिलैक्स रहे।
यहाँ फेंग शुई का वो सच है जो अक्सर लोग नहीं बताते, एकदम सरल लॉजिक के साथ:

  1. हवा और पानी का खेल (The Name Logic)
    ‘फेंग’ का मतलब है हवा और ‘शुई’ का मतलब है पानी।
    सोचिए, अगर हवा एक कमरे में बंद हो जाए तो क्या होगा? घुटन होगी। अगर पानी एक जगह रुक जाए तो क्या होगा? सड़ जाएगा।
    बस यही नियम आपके घर पर लागू होता है। आपके घर में ‘ऊर्जा’ (Energy) हवा की तरह बहनी चाहिए। अगर आपके घर में बहुत ज्यादा सामान ठुसा हुआ है, तो ऊर्जा अटक जाएगी और घर ‘बासी’ हो जाएगा। फेंग शुई बस उस बहाव को ठीक करने का नाम है।
  2. घर आपका ‘चार्जर’ है
    हम सब एक मोबाइल फोन की तरह हैं। दिन भर काम करके हम थक जाते हैं (बैटरी लो हो जाती है)। हम घर क्यों आते हैं? रिचार्ज होने के लिए।
    फेंग शुई का अनोखा लॉजिक यह है: आपका घर एक चार्जर है।
    अगर चार्जर की तार टूटी हो (घर में क्लेश या गंदगी हो), तो फोन चार्ज नहीं होगा। फेंग शुई आपके घर को एक ‘फास्ट चार्जर’ बनाता है। बिस्तर सही दिशा में हो, रोशनी सही हो, तो आपकी नींद गहरी होगी और आप अगले दिन 100% चार्ज होकर उठेंगे।
  3. ‘कमांड पोजीशन’ का राज (डर का मनोविज्ञान)
    फेंग शुई कहता है कि “दरवाजे की तरफ पीठ करके मत बैठो।”
    यह कोई अंधविश्वास नहीं है, यह मानव स्वभाव (Human Nature) है। आदिमानव के जमाने से हमारे अंदर एक डर है कि “पीछे से कोई हमला न कर दे।”
    जब आप दीवार की तरफ मुँह करके बैठते हैं और दरवाजा आपके पीछे होता है, तो आपका अचेतन मन (Subconscious Mind) हमेशा सतर्क और डरा रहता है। आप रिलैक्स नहीं हो पाते। फेंग शुई बस इतना कहता है—कुर्सी या बिस्तर ऐसे रखो कि तुम्हें दिखने वाला हो कि दरवाजे से कौन आ रहा है। इसे ही ‘कमांड पोजीशन’ कहते हैं। जब डर खत्म होता है, तभी सफलता आती है।
  4. कबाड़ मतलब कन्फ्यूजन
    फेंग शुई में सफाई पर इतना जोर क्यों है?
    क्योंकि बाहर का कबाड़ = दिमाग का कबाड़।
    जब आपकी आँखों के सामने ढेर सारी फालतू चीजें, पुराने बिल, या टूटे बर्तन होते हैं, तो आपका दिमाग उन्हें प्रोसेस करने में अपनी ऊर्जा खर्च करता रहता है। इससे आपको थकान होती है और नए विचार (Ideas) नहीं आते। फेंग शुई कहता है—पुरानी चीजें हटाओ, ताकि नई खुशियों के लिए जगह बने।
    फेंग शुई कोई धर्म नहीं है। यह “वातावरण का मनोविज्ञान” (Environmental Psychology) है। यह बस यह सिखाता है कि अपने घर से प्यार करो, उसे साँस लेने दो। जब आप अपने घर का ख्याल रखते हैं, तो घर आपका ख्याल रखता है।

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