स्वप्न का हमारे जीवन के साथ गहरा नाता है। स्वप्न क्यों आते हैं, उनका वास्तविक जीवन से क्या संबंध है, यह हर कोई जानना चाहता है क्या स्वप्न जीवन को प्रभावित करते हैं- ऐसे अनेक प्रश्न हर वक्त दिमाग में चलते रहते है । इस सपनो की दुनिया के रहस्य की पड़ताल सदियों से होती आ रही है। लेकिन अनेक खोजों के बावजूद आज भी स्वप्न की यह दुनिया रहस्य ही बनी हुई है।
सपने देखना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. इसे कोई रोक नहीं सका है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सोते वक्त आने वाले सपनों का हमारे वास्तविक जीवन से सीधा संबंध और गहरा नाता होता है क्या वाकई सपनों में भविष्य की घटनाओं का संकेत मिलता है हर व्यक्ति जानना चाहता है सपनों का वास्तविक जीवन से कोई संबंध hota hai ya नहीं। स्वप्न विज्ञान का प्रमुख आधार है, मन। निद्रावस्था में शरीर के शिथिल हो जाने पर भी मानव मन-मस्तिष्क सक्रिय रहता है। मन के अंदर कई परतों का समावेश है, जिसमें चेतन, अवचेतन मन और अर्द्धचेतन मन का प्रमुख योगदान है।
सपने क्या हैं? क्या ये बात सही है कि जिसकी जैसी सोच होती है, उसे वैसे ही स्वप्न आते हैं। क्या इनका रिश्ता हमारे भूतकाल से पिछले जन्म से वर्तमान से या भविष्य से होता है? सपनों की सैकड़ों कहानियां हैं प्रसिद्ध दार्शनिक फ्रायड ने पहली बार स्वप्नों की प्रक्रिया, संरचना, रहस्यों और कारणों पर प्रकाश डाला। व्यक्ति जब निद्रा की अवस्था में होता है तो उसका शरीर पूरी तरह से निष्क्रिय होता है फिर उन्हें सपने में विचित्र अनुभव होते हैं वह इन अनुभूति के कारण कभी दुखी होता है तो कभी खुश प्राचीन काल में हुई लोगों को इस तरह की अनुभूतियों को दैवीय शक्तियों की देन कहा जाता था अंत उसके अनुसार इनका हमारे दैनिक जीवन से कोई संबंध नहीं माना जाता था किंतु आधुनिक काल में इसके बिल्कुल विपरीत माना जाता है अनेक प्रकार के मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर आधुनिक काल में सपनो को व्यक्ति के दैनिक जीवन से संबंधित माना जाता
वैज्ञानिकों के अनुसार, मस्तिष्क को दिनभर में घटनाक्रम के रूप में अनेक संकेत प्राप्त होते हैं। व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति द्वारा प्राप्त होने वाले इन अनुभवों का प्रभाव मन मस्तिष्क पर पड़ता है। फलस्वरूप हम बहुत-सी कल्पनाएं करते हैं। सोच-विचार करते हैं और योजनाएं बनाते हैं। हमारे द्वारा बनाई गई सभी योजनाएं पूर्ण नहीं हो सकती हैं। इसलिए हमारी अतृप्त इच्छाएं स्मृति पटल पर गहरे रूप में अंकित हो जाती हैं, यानी की हमारे अवचेतन मन में जो सुप्त अवस्था में स्वप्नों के माध्यम से जागृत हो जाती हैं।
सामाजिक परिवेश में हम जिन भावनाओं को खुलकर अभिव्यक्त नहीं कर पाते, वहीं भावनाएं हमारे चेतन मन से अवचेतन मन में जाकर दर्ज हो जाती हैं। रात्रि में जब शरीर आराम कर रहा होता है, तब यह स्वप्न रूप भावनाएं और काल्पनिक दुनिया के साथ मेल करके एक अलग ही दृश्य प्रकट करता है। अवचेतन मन का निद्रावस्था में विचरण ही स्वप्नों का मूल कारण है। निद्रावस्था में चेतन मन कार्य नहीं करता, क्योंकि वह शरीर के सो जाने पर सो जाता है। किन्तु अवचेतन मन उस दशा में भी उसके आसपास रहता है और पूर्ण रूप से जागृत अवस्था में होता है।
जागृत अवस्था में हम अनेक कल्पनाएं करते हैं, अनेक बातों पर विचार करते हैं और अनेक दृश्य देखते हैं। चेतन मन तो इन सब बातों को भूल जाता है किन्तु अवेचतन मन उस सब बातों, कल्पनाओं एवं दृश्यों से जुड़ा रहता है। अवचेतन मन के साथ जुड़ी वही बातें, वही दृश्य एक काल्पनिक दुनिया का स्वरूप लेकर के हमें निद्रावस्था में स्वप्न में दिखाई देते हैं। स्वप्न में किसी भी व्यक्ति, वस्तु अथवा परिस्थिति का प्रतिबिम्ब हमेशा यथावत एवं स्पष्ट नहीं होता है। अतः संकेतों की भाषा अथवा स्वप्न रहस्यों को सुलझाने के लिए पंडित/ज्योतिषी की आवश्यकता पड़ती है।
सपने तीन स्तर पर काम करते हैं। एक वे जो मानसिक अवस्था और प्रवृत्तियों का संकेत देते हैं। दूसरे वे जो परा-भावनाओं के प्रतीक होते हैं और समस्याओं को सुलझाने में मदद करते हैं। तीसरे वे जो आध्यात्मिक चेतना के शिखर तक का मार्ग दिखा सकते हैं। अधिकांश स्वप्न का प्रभाव हमारी दिनचर्या पर नहीं होता,
दिन में देखे गए स्वप्न, मानसिक तनाव के दौरान देखे गए स्वप्न, शारीरिक बीमारी के कारण चिन्ताग्रस्त होने पर देखे गए स्वप्न तथा मादक द्रव्यों का सेवन करने के पश्चात देखे गए स्वप्न प्रायः निष्फल होते हैं। एक रात में एक से अधिक स्वप्न दृश्य हों, तो अंतिम स्वप्न ही फलदायक होता है। सूर्योदय से कुछ समय पूर्व देखे गए स्वप्न तत्काल फल देने वाले होते हैं।
लेकिन सपनों की दुनिया के बारे में, अभी अंतिम रूप से दुनिया कुछ नहीं कह सकती। इसकी एक वजह यह भी है कि तमाम वैज्ञानिकों ने इस बात का खुलासा किया है कि उन्हें उन महान आविष्कारों की जानकारी और समझ किसी दिन सोते हुए सपने में आयी और न सिर्फ यह सपना याद रहा बल्कि उन्होंने महान आविष्कार कर डाले। वैज्ञानिकों की ये बातें मनोवैज्ञानिकों की उन बातों को काटती हैं, जिसमें वो कहते हैं सपने कुछ नहीं हमारे दिन भर की गतिविधियों के ही नतीजे होते हैं।
प्राचीन समय में सपनों के जरिए इलाज भी होता था, इसे ड्रीम थैरेपी कहा जाता था।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, हर सपना कुछ कहता है।

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