विनम्र और शिष्ट व्यक्ति के आचार विचार व व्यवहार में एक गजब का आकर्षण होता है उसके प्रत्येक कार्य में एक महत्वपूर्ण संतुलन होता है मुझे आपसे मिलकर बड़ी प्रसन्नता हुई मैं आपसे बेहद प्रभावित हूं यह एक ऐसा वाक्य है जिसे सभी कोई सुनना पसंद करता है तथा इसे सुनकर गौरव का अनुभव प्राप्त करता है आपके भीतर इतना चुंबक रूपी आकर्षक हो जो दूसरों को प्रभावित कर दे लेकिन विनम्र वह मृदु भाषी बने बिना अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली नहीं बनाया जा सकता नम्रता रूपी न्नींव पर ही सद्गुरु रूपी इमारत का निर्माण किया जा सकता है एक साधारण व्यक्ति विनम्र एवं मृदु भाषी बनकर समाज में प्रतिष्ठा का सकता है जबकि इन दोनों गुणों से वंचित धनवान पुरुष भी अपनी प्रतिष्ठा खो बैठता है। हम सामाजिक क्षेत्र में है अथवा अपने कार्य स्थल पर एक दूसरे से बातचीत करना ही पड़ता है ऐसे में उचित व अनुचित का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है अनेक बार हम आन्यास बातें कहकर अथवा व्यर्थ की बातचीत करके अपना अच्छा खासा खेल बिगाड़ लेते हैं किसी ने हम पर कोई व्यंग कसा नहीं कि हम क्रोधित होकर उसे पर टूट पड़ते हैं अगर बीच में कोई दूसरा व्यक्ति कुछ और बोला तो हम उससे भी उलझ जाते हैं इस तरह हम बेवजह ही अपने द्वारा बनाए गए चक्रव्यूह में फंसते चले जाते हैं हमें बात तुरंत लग जाती है हम उत्तर देने के अवसर खोजने लगते हैं चुप रहना भी एक बहुत बड़ी कला है और चुप रह कर धीरे से मुस्कुरा देना उससे भी बड़ी कला है इस संसार चक्र में बोलने के साथ-साथ सुनने और देखने के लिए भी बहुत कुछ है यदि हम मुस्कुराते हुए उसे बात को सह लेते और अपने काम से काम रखते तो कितना अच्छा होता लेकिन हमें से अनेक लोग ऐसे भी होते हैं जो बोलने की धुन में कुछ देख नहीं पाते और नहीं कुछ सुन पाते हैं याद रखें जो अपनी वाणी पर संयम रख सकता है वह अपनी आंखों और कानों का सही उपयोग कर सकता है। किसी भी सार्वजनिक स्थल का किसी कार्यक्रम पर उल्टी सीधी बात बोल देने पर बात का बतंगड़ बन जाता है अक्सर देखा गए कि कड़वे वह चोटिले वचन ज्यादातर झगड़े का कारण बनते हैं । एक आम कहावत है। बाण लगने से घाव को भरा जा सकता है लेकिन वाणी के घाव को भरना आसंभव नहीं तो कठिन जरूर है हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि मधुर व प्रिय वचनों को ही अपने व्यवहार में प्रयोग करें क्योंकि वाणी पर संयम रखने वाला व्यक्ति समाज में सदैव सम्मानित होता है सब लोग उसकी और आकर्षित होते हैं । व्यक्ति अपनी अनियंत्रित वाणी के कारण जितनी हानि उठाता है उतनी हानि दूसरे कर्म से नहीं उठानी पड़ती। स्पष्ट वादित का ढोंग रचने वालों की मान्यता है कि तत्काल मुंह तोड़ जवाब न देने वाला व्यक्ति कमजोरी का प्रतीक है इस तरह के लोग खरी बात कह कर स्वयं को निश्चल एवं स्पष्ट वादी होने का दावा करते हैं जबकि मनोवैज्ञानिकों का विचार है किस प्रकार की मान्यता व्यक्ति के मिथ्या दंभ को दर्शाती है वाणी तो विचारों का आईना होती है जो लोग बातचीत में बहुत खड़ी और असंतुलित भाषा का प्रयोग करते हैं वे दूसरों के मन में कोई जगह नहीं बना पाते । जब तक मन में कटुता के अंकुर नहीं फूटेंगे तब तक छुपाने वाली बात आपकी जुबान से निकलेगी ही नहीं।
यदि आप उन चीजों का आत्म विश्लेषण करें जो आपको बुरी लगती है तो आपको मालूम होगा कि उनमें से अधिकांश वे है जिन्हें अपने मामूली समझा था या उन्हें कमतर मानकर हवा में उड़ा दिया था लिहाजा भलाई इसी में है कि आप छोटी-मोटी बातों का सदैव ध्यान रखें बड़ी बातें तो अपना ध्यान रखने में स्वयं समर्थ होती हैं इसलिए मनोवैज्ञानिक इन छोटी-मोटी बातों को भयंकर भूल करार देते हैं क्योंकि यदि इनका आरंभ में ही दमन नहीं कर दिया गया तो एक दिन यह छोटी छोटी बातें विकराल रूप धारण कर लेती हैं। मधुर वचन बड़े ही लाभकारी है वे कड़वी बातों से उत्पन्न होने वाले धक्कों को सहन करने की क्षमता रखते हैं और जीवन रूपी गाड़ी की हिचकोलों को मधुर बना देते हैं वास्तव में व्यक्ति के आचरण की छोटी-मोटी तथा स्नेहपूर्ण बातें जीवन को मधुर बनती हैं इसीलिए कहते हैं स्वभाव में विनम्रता लाइए और जितना ही आप विनम्रता का व्यवहार करेगी उतनी लोकप्रियता प्रशंसा आप प्राप्त करेंगे समस्त कार्य वाणी द्वारा नियंत्रित होते हैं वाणी से ही उनकी उत्पत्ति होती है अतः वाणी पर मन का नियंत्रण होना बहुत ही महत्वपूर्ण है। विनम्र बने के लिए कुछ खर्च नहीं करना पड़ता अपितु यह आपको महान बनाती है इसे अपनाने वाले प्रसन्नता रूपी खजाने से मालामाल हो जाते हैं और इसे बांटने वाले कभी दरिद्र नहीं रहता यह थके हुए पथिक के लिए आश्रय रूपी वृक्ष है खराब बात को भी यदि अच्छे ढंग से कहा जाए तो वह प्रभाव पूर्ण हो जाती है इसलिए सदैव सावधानी बरते कि हम जैसी बात कर कहेंगे वैसा ही विभिन्न व्यक्ति विभिन्न अवसर पर हमारे बारे में सोचेंगे और हमारे साथ इस आधार पर अपना बर्ताव करेंगे और हमारी छवि भी उसी आधार पर उनके सामने निर्मित होती चली जाएगी कटु वचन आपके अविवेकी होने के परिचायक है याद रखिए की अप्रिय वाणी बोलने वाला व्यक्ति प्राय विवेक की स्थिति में अपने किए हुए पर पश्चाताप करता हुआ देखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है की आप समस्त व्यवहार और कार्यों को अनदेखा करें आप उनके उत्तर दें पर सोच समझकर और विचार करके कि आप जो बोल रहे हैं कहीं उसकी वजह से आपकी छवि खराब तो नहीं हो रही है इस विषय पर आत्म विश्लेषण करके ।

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